Monday, July 22, 2024
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पूर्व सीएम हरीश रावत और हरक को सीबीआई का समन उत्तराखंड में नोटिस का मामला गरमाया

11 मई 2019 को हरीश रावत के विश्वासमत हासिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटा दिया था।

उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत को सीबीआई ने समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। पूर्व सीएम रोड एक्सिडेंट में घायल होने के बाद अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उन्हें अस्पताल में ही सीबीआई की नोटिस थमाई गई। वहीं, प्रदेश के पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को भी सीबीआई का नोटिस मिला है।
उत्तराखंड स्टिंग केस में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई एक्शन मोड में है। केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को पूछताछ का नोटिस दिया गया है। उनके साथ-साथ कांग्रेस के एक अन्य दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को भी सीबीआई ने नोटिस थमाया है। सीबीआई दोनों सीनियर नेताओं का वॉयस सैंपल लेगी। एक्सिडेंट के बाद अस्पताल में इलाज करा रहे हरीश रावत को सीबीआई ने वहीं पर नोटिस थमाया। इस पर उन्होंने आश्चर्य जताया। वहीं, हरक सिंह रावत ने भी सीबीआई का नोटिस मिलने की पुष्टि की है। दोनों नेताओं को सीबीआई के समक्ष 7 नवंबर को पेश होना है।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने फेसबुक पेज पर खुद को नोटिस दिए जाने के संबंध में जानकारी देते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी पर तंज कसा। उन्होंने लिखा कि आज जौलीग्रांट हॉस्पिटल में मेरे स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए एक बड़ी महत्वपूर्ण संस्था भी आई, सीबीआई के दोस्त आए। उन्होंने मुझे एक नोटिस दिया तो मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ। मैंने कहा कि जिस दिन हॉस्पिटल में लोग स्वास्थ्य का हाल-चाल पूछने आ रहे हैं तो सीबीआई को लगा होगा फिर कहीं कि मुझसे, देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा और लोकतंत्र को कुछ ज्यादा खतरा है। इसलिए हॉस्पिटल में ही उन्होंने मुझे नोटिस थमा दिया। पूर्व सीएम को अस्पताल में नोटिस दिए जाने पर सवाल उठाए जाने लगे हैं।
वर्ष 2016 का है मामला

वर्ष 2016 स्टिंग प्रकरण मामले को लेकर सीबीआई भी जॉलीग्रांट हॉस्पिटल पहुंची थी। दरअसल, हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान विधायकों की खरीद- फरोख्त को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक स्टिंग सामने आया था। हालांकि, इस दौरान हरक सिंह रावत समेत कांग्रेस के कई नेता बीजेपी में चले गए थे। विधायकों को कांग्रेस में बनाए रखने के लिए हरीश रावत से डीलिंग का वीडियो सामने आया था। इसी मामले में सीबीआई दोनों नेताओं का वायस सैंपल लेने की तैयारी में है।

11 मई 2019 को हरीश रावत के विश्वासमत हासिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटा दिया था। साल 2016 के बहुचर्चित स्टिंग ऑपरेशन मामले में सीबीआई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, मदन सिंह बिष्ट और उमेश कुमार को नोटिस जारी कर आदेश दिए हैं. सीबीआई ने इन चारों नेताओं के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी, जिस पर ये आदेश जारी किया गया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा सब सत्ता का खेल है। हमारे ऊपर किसी भी तरीके की जांच की जाए। उससे जो कुहासा लगेगा, वो छंटेगा। पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत का कहना है, उन्हें सीबीआई कोर्ट से अब तक कोई नोटिस नहीं मिला। यदि कोर्ट से नोटिस मिलेगा तो उस पर अमल किया जाएगा। हरक सिंह रावत ने तो बातों बातों में ये अल्टीमेटम भी दे दिया है कि जब सीबीआई उनसे सवाल पूछेगी तो एक एक कर कई परते खुलेंगी। 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग के बाद उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आ गया था। दोनों ही स्टिंग को लेकर उमेश कुमार ने दावा किया था कि हरीश रावत सरकार को बचाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की डीलिंग की जा रही थी। स्टिंग में रुपयों के लेन-देन होने की बात का दावा भी किया गया था। अब एक बार फिर से स्टिंग का वो जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। आगे क्या होता है? उत्तराखंड की राजनीति किस किरवट बैठती है। देखते रहिए..कुछ रोचक होने वाला है।

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