Tuesday, July 16, 2024
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रात तक 18 मीटर पाइप मलबे में डाले जा चुके हैं। नई ऑगर मशीन से रेस्क्यू शुरू

रात तक 18 मीटर पाइप मलबे में डाले जा चुके हैं . यह मशीन एक घंटे मे पांच से छह मीटर तक ड्रिलिंग कर रही है पर डेढ़ घंटे में सिर्फ तीन मीटर ही पाइप मलबे में जा पा रहा है। पाइप वेल्डिंग और एलाइनमेंट सही करने में ज्यादा समय लग रहा है। इसी गति से कार्य चलता रहा तो मजदूरों को बाहर निकालने में कम से कम 48 घंटे का समय और लग सकता है

दरअसल, सिलक्यारा सुरंग में नई और शक्तिशाली ऑगर मशीन ने शुक्रवार सुबह तक 24 मीटर मलबे को भेद दिया, जिससे पिछले पांच दिनों से अधिक समय से उसके अंदर फंसे 40 श्रमिकों के जल्द बाहर आने की उम्मीद बढ़ गई थी, मगर 24 मीटर बाद ही बोरिंग का काम रोक दिया गया. सिलक्यारा में बने उत्तरकाशी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, सुरंग में जमा मलबे में सुबह छह बजे तक 24 मीटर की दूरी तकड्रिलिंगहो चुकी थी. सुरंग में 45 से 60 मीटर तक मलबा जमा है जिसमें ड्रिलिंग की जानी है.

योजना यह है कि ड्रिलिंग के जरिए मलबे में रास्ता बनाते हुए उसमें 800 मिमी और 900 मिमी व्यास के कई बड़े पाइप को एक के बाद एक इस तरह डाला जाएगा कि मलबे के एक ओर से दूसरी ओर तक एक वैकल्पिक सुरंग बन जाए और श्रमिक उसके माध्यम से बाहर आ जाएं. इससे पहले, मंगलवार देर रात एक छोटी ऑगर मशीन से मलबे में ड्रिलिंग शुरू की गयी थी, लेकिन इस दौरान भूस्खलन होने से काम को बीच में रोकना पड़ा था. बाद में वह ऑगर मशीन भी खराब हो गयी थी.

हो सकता है बड़ा हादसा, सेटेलाइट से दिखा भूधंसाव ….

उत्तरकाशी में यमुनोत्री राजमार्ग पर निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन के मामले में एक बड़ा अपडेट आता दिख रहा है। यहां बड़ा हादसा हो सकता है। सेटेलाइट के विश्लेषण से यह बात कही गई है कि सिल्क्यारा क्षेत्र में भूधंसाव नजर आ रहा है। इस पर विस्तृत रुप से अध्य्यन की जरूरत है। फिलहाल इसकी जांच की जा रही है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

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